Why Are US-Iran Relations Always Unstable? A Historical Analysis

अमेरिका–इरान सम्बन्ध किन सधैं अस्थिर रहन्छ? इतिहासको विश्लेषण नेपाली

अमेरिका-ईरान संबंध हमेशा अस्थिर क्यों रहते हैं? एक ऐतिहासिक विश्लेषण हिंदी

अमेरिका–इरान सम्बन्ध किन सधैं अस्थिर रहन्छ? इतिहासको विश्लेषण 中文

Why Are US-Iran Relations Always Unstable? A Historical Analysis

Special Analysis | Kathmandu

The relationship between the US and Iran is one of the most complex, sensitive, and long-term tense relationships in world politics. Although there has been no formal direct war, proxy wars, economic sanctions, and limited military clashes have been continuously occurring between these two nations for decades.

The roots of this conflict are deeply embedded in history—where competition for power, ideology, and regional dominance is intertwined.

1953: Seeds of Hostility

The conflict began with a political upheaval in 1953.

After Iran's then-Prime Minister Mohammad Mossadegh nationalized the oil industry, Western powers became dissatisfied. Subsequently, "Operation Ajax" was carried out in cooperation with the Central Intelligence Agency (CIA) and Britain.

This operation removed the democratic government and empowered Mohammad Reza Pahlavi.

 This event created deep mistrust towards America among the Iranian populace.

 1979: Islamic Revolution and Severance of Relations

This event proved to be a "turning point" in the conflict.

The Islamic Revolution led by Ruhollah Khomeini ended the Shah's rule and made Iran an Islamic Republic.

Subsequently, the Iran Hostage Crisis, where the US embassy in Tehran was seized and 52 diplomats were held hostage for 444 days, completely severed diplomatic relations between the two countries.

Main Causes of the Conflict

1. Nuclear Program

The US has been accusing Iran of trying to develop nuclear weapons.

Although an agreement was reached through the 2015 Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA), tensions escalated again after Donald Trump withdrew the US in 2018.

2. Proxy Wars and Regional Influence

Iran has been supporting various groups to expand its influence in the Middle East:

Hezbollah (Lebanon)

Houthis (Yemen)

Hamas (Palestine)

The US considers these groups "terrorists," which has further complicated the conflict.

3. Israel's Security

Iran has adopted a policy of not recognizing Israel and opposing it. Since Israel is a major strategic partner of the US, this issue remains at the center of the conflict.

Recent Tensions: On the Brink of War

In recent years, the conflict appears to have moved in a more dangerous direction.

2020: Assassination of Qasem Soleimani in a US drone strike

2023–24: Attack-retaliation attacks in Syria, Iraq, and the Red Sea region during the Gaza War

These events have increased the risk of the "proxy war" transforming into a real war.

 Conclusion: A Struggle for Power, Ideology, and Dominance

The US–Iran conflict is not just a geopolitical dispute. It is a struggle for ideology, balance of power, and regional hegemony.

US: Seeks to maintain influence in the Middle East and ensure Israel's security

Iran: Seeks to remove US influence from the region and establish itself as a regional power

⚡ Final Question

Will this "proxy war" ever turn into a full-scale war?

The answer is still uncertain. But one thing is clear: The US–Iran relationship remains a continuous challenge for global peace. 

विशेष विश्लेषण | काठमाडौँ

अमेरिका र इरानबीचको सम्बन्ध विश्व राजनीतिमा सबैभन्दा जटिल, संवेदनशील र दीर्घकालीन तनावपूर्ण सम्बन्धमध्ये एक हो। औपचारिक रूपमा प्रत्यक्ष युद्ध नभए पनि, दशकौँदेखि यी दुई राष्ट्रबीच प्रोक्सी युद्ध, आर्थिक प्रतिबन्ध र सीमित सैन्य झडपहरू निरन्तर भइरहेका छन्।

यस द्वन्द्वको जरा इतिहासमा गहिरो रूपमा गाडिएको छ—जहाँ शक्ति, विचारधारा र क्षेत्रीय वर्चस्वको प्रतिस्पर्धा मिसिएको छ।

१९५३: शत्रुताको बीउ

द्वन्द्वको सुरुवात सन् १९५३ मा भएको राजनीतिक उलटफेरबाट हुन्छ।

इरानका तत्कालीन प्रधानमन्त्री Mohammad Mossadegh ले तेल उद्योगलाई राष्ट्रियकरण गरेपछि पश्चिमी शक्तिहरू असन्तुष्ट बने। त्यसपछि Central Intelligence Agency (CIA) र बेलायतको सहकार्यमा “Operation Ajax” सञ्चालन गरियो।

यस अपरेसनले लोकतान्त्रिक सरकारलाई हटाएर Mohammad Reza Pahlavi लाई शक्तिशाली बनायो।

 यही घटनाले इरानी जनमानसमा अमेरिकाप्रति गहिरो अविश्वास पैदा गर्यो।

 १९७९: इस्लामिक क्रान्ति र सम्बन्ध विच्छेद

यो घटना द्वन्द्वको “टर्निङ पोइन्ट” साबित भयो।

Ruhollah Khomeini को नेतृत्वमा भएको इस्लामिक क्रान्तिले शाह शासन अन्त्य गर्यो र इरानलाई इस्लामिक गणतन्त्र बनायो।

त्यसपछि तेहरानस्थित अमेरिकी दूतावास कब्जा गरी ५२ जना कूटनीतिज्ञलाई ४४४ दिन बन्धक बनाइएको Iran Hostage Crisis ले दुई देशबीचको कूटनीतिक सम्बन्ध पूर्ण रूपमा तोड्यो।

द्वन्द्वका मुख्य कारणहरू

१. आणविक कार्यक्रम

अमेरिकाले इरानलाई आणविक हतियार बनाउन खोजेको आरोप लगाउँदै आएको छ।

२०१५ को Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) मार्फत सम्झौता भए पनि, Donald Trump ले २०१८ मा अमेरिका फिर्ता गरेपछि तनाव पुनः चुलियो।

२. प्रोक्सी युद्ध र क्षेत्रीय प्रभाव

इरानले मध्यपूर्वमा आफ्नो प्रभाव विस्तार गर्न विभिन्न समूहलाई समर्थन गर्दै आएको छ:

Hezbollah (लेबनान)

Houthis (यमन)

Hamas (प्यालेस्टाइन)

अमेरिकाले यी समूहलाई “आतंकवादी” मान्दै आएको छ, जसले द्वन्द्वलाई अझ जटिल बनाएको छ।

३. इजरायलको सुरक्षा

इरानले Israel लाई मान्यता नदिने र उसको विरोध गर्ने नीति अपनाएको छ।इजरायल अमेरिकाको प्रमुख रणनीतिक साझेदार भएकाले यो विषय द्वन्द्वको केन्द्रमा रहन्छ।

पछिल्लो तनाव: युद्धको किनारमा

हालका वर्षहरूमा द्वन्द्व झन् खतरनाक दिशातर्फ गएको देखिन्छ।

२०२०: Qasem Soleimani को अमेरिकी ड्रोन हमलामा हत्या

२०२३–२४: Gaza War को क्रममा सिरिया, इराक र लाल सागर क्षेत्रमा आक्रमण–जवाफी आक्रमण

यी घटनाले “छद्म युद्ध” लाई वास्तविक युद्धमा रूपान्तरण हुने जोखिम बढाएको छ।

 निष्कर्ष: शक्ति, विचारधारा र वर्चस्वको लडाइँ

अमेरिका–इरान द्वन्द्व केवल भू-राजनीतिक विवाद मात्र होइन। यो विचारधारा, शक्ति सन्तुलन र क्षेत्रीय प्रभुत्व को संघर्ष हो।

अमेरिका: मध्यपूर्वमा प्रभाव कायम राख्न र इजरायलको सुरक्षा सुनिश्चित गर्न चाहन्छ

इरान: क्षेत्रबाट अमेरिकी प्रभाव हटाएर आफूलाई क्षेत्रीय शक्तिका रूपमा स्थापित गर्न खोज्छ

⚡ अन्तिम प्रश्न

के यो “छद्म युद्ध” कहिल्यै पूर्ण युद्धमा परिणत हुन्छ?

उत्तर अझै अनिश्चित छ। तर एउटा कुरा स्पष्ट छअमेरिका–इरान सम्बन्ध विश्व शान्तिका लागि निरन्तर चुनौती बनेको छ 

विशेष विश्लेषण | काठमाडौँ

अमेरिका और ईरान के बीच संबंध विश्व राजनीति में सबसे जटिल, संवेदनशील और दीर्घकालिक तनावपूर्ण संबंधों में से एक हैं। औपचारिक रूप से प्रत्यक्ष युद्ध न होने के बावजूद, दशकों से इन दोनों राष्ट्रों के बीच प्रोक्सी युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध और सीमित सैन्य झड़पें लगातार होती रही हैं।

इस संघर्ष की जड़ें इतिहास में गहराई से दबी हुई हैं—जहाँ शक्ति, विचारधारा और क्षेत्रीय वर्चस्व की प्रतिस्पर्धा मिली हुई है।

1953: शत्रुता का बीज

संघर्ष की शुरुआत सन् 1953 में हुए राजनीतिक उलटफेर से होती है।

ईरान के तत्कालीन प्रधान मंत्री मोहम्मद मोसाद्देघ द्वारा तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण करने के बाद पश्चिमी शक्तियाँ असंतुष्ट हो गईं। उसके बाद सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) और ब्रिटेन के सहयोग से "ऑपरेशन अजाक्स" संचालित किया गया।

इस ऑपरेशन ने लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर मोहम्मद रज़ा पहलवी को शक्तिशाली बनाया।

 इसी घटना ने ईरानी जनमानस में अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास पैदा किया।

 1979: इस्लामिक क्रांति और संबंध विच्छेद

यह घटना संघर्ष का "टर्निंग पॉइंट" साबित हुई।

रुहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में हुई इस्लामिक क्रांति ने शाह शासन को समाप्त कर दिया और ईरान को इस्लामिक गणराज्य बना दिया।

उसके बाद तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 52 राजनयिकों को 444 दिनों तक बंधक बनाए रखने वाले ईरान बंधक संकट ने दोनों देशों के बीच के राजनयिक संबंधों को पूरी तरह से तोड़ दिया।

संघर्ष के मुख्य कारण

1. परमाणु कार्यक्रम

अमेरिका ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है।

2015 के ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) के माध्यम से समझौता होने के बावजूद, डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 2018 में अमेरिका के इससे हटने के बाद तनाव फिर से बढ़ गया।

2. प्रोक्सी युद्ध और क्षेत्रीय प्रभाव

ईरान मध्यपूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए विभिन्न समूहों का समर्थन करता रहा है:

हिज़्बुल्लाह (लेबनान)

हूती (यमन)

हमास (फिलिस्तीन)

अमेरिका इन समूहों को "आतंकवादी" मानता रहा है, जिसने संघर्ष को और जटिल बना दिया है।

3. इज़राइल की सुरक्षा

ईरान ने इज़राइल को मान्यता न देने और उसका विरोध करने की नीति अपनाई है। इज़राइल अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक साझेदार है, इसलिए यह विषय संघर्ष के केंद्र में रहता है।

हालिया तनाव: युद्ध के कगार पर

हाल के वर्षों में संघर्ष और खतरनाक दिशा की ओर जाता दिख रहा है।

2020: कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में हत्या

2023–24: गाजा युद्ध के दौरान सीरिया, इराक और लाल सागर क्षेत्र में हमले–जवाबी हमले

इन घटनाओं ने "छद्म युद्ध" को वास्तविक युद्ध में बदलने का जोखिम बढ़ा दिया है।

 निष्कर्ष: शक्ति, विचारधारा और वर्चस्व की लड़ाई

अमेरिका–ईरान संघर्ष केवल भू-राजनीतिक विवाद नहीं है। यह विचारधारा, शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय प्रभुत्व का संघर्ष है।

अमेरिका: मध्यपूर्व में प्रभाव कायम रखना और इज़राइल की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है

ईरान: क्षेत्र से अमेरिकी प्रभाव हटाकर खुद को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है

⚡ अंतिम प्रश्न

क्या यह "छद्म युद्ध" कभी पूर्ण युद्ध में परिणत होगा?

उत्तर अभी अनिश्चित है। लेकिन एक बात स्पष्ट है—अमेरिका–ईरान संबंध विश्व शांति के लिए निरंतर चुनौती बने हुए हैं। 

विशेष विश्लेषण | काठमाडौँ

अमेरिका र इरानबीचको सम्बन्ध विश्व राजनीतिमा सबैभन्दा जटिल, संवेदनशील र दीर्घकालीन तनावपूर्ण सम्बन्धमध्ये एक हो। औपचारिक रूपमा प्रत्यक्ष युद्ध नभए पनि, दशकौँदेखि यी दुई राष्ट्रबीच प्रोक्सी युद्ध, आर्थिक प्रतिबन्ध र सीमित सैन्य झडपहरू निरन्तर भइरहेका छन्।

यस द्वन्द्वको जरा इतिहासमा गहिरो रूपमा गाडिएको छ—जहाँ शक्ति, विचारधारा र क्षेत्रीय वर्चस्वको प्रतिस्पर्धा मिसिएको छ।

१९५३: शत्रुताको बीउ

द्वन्द्वको सुरुवात सन् १९५३ मा भएको राजनीतिक उलटफेरबाट हुन्छ।

इरानका तत्कालीन प्रधानमन्त्री Mohammad Mossadegh ले तेल उद्योगलाई राष्ट्रियकरण गरेपछि पश्चिमी शक्तिहरू असन्तुष्ट बने। त्यसपछि Central Intelligence Agency (CIA) र बेलायतको सहकार्यमा “Operation Ajax” सञ्चालन गरियो।

यस अपरेसनले लोकतान्त्रिक सरकारलाई हटाएर Mohammad Reza Pahlavi लाई शक्तिशाली बनायो।

 यही घटनाले इरानी जनमानसमा अमेरिकाप्रति गहिरो अविश्वास पैदा गर्यो।

 १९७९: इस्लामिक क्रान्ति र सम्बन्ध विच्छेद

यो घटना द्वन्द्वको “टर्निङ पोइन्ट” साबित भयो।

Ruhollah Khomeini को नेतृत्वमा भएको इस्लामिक क्रान्तिले शाह शासन अन्त्य गर्यो र इरानलाई इस्लामिक गणतन्त्र बनायो।

त्यसपछि तेहरानस्थित अमेरिकी दूतावास कब्जा गरी ५२ जना कूटनीतिज्ञलाई ४४४ दिन बन्धक बनाइएको Iran Hostage Crisis ले दुई देशबीचको कूटनीतिक सम्बन्ध पूर्ण रूपमा तोड्यो।

द्वन्द्वका मुख्य कारणहरू

१. आणविक कार्यक्रम

अमेरिकाले इरानलाई आणविक हतियार बनाउन खोजेको आरोप लगाउँदै आएको छ।

२०१५ को Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) मार्फत सम्झौता भए पनि, Donald Trump ले २०१८ मा अमेरिका फिर्ता गरेपछि तनाव पुनः चुलियो।

२. प्रोक्सी युद्ध र क्षेत्रीय प्रभाव

इरानले मध्यपूर्वमा आफ्नो प्रभाव विस्तार गर्न विभिन्न समूहलाई समर्थन गर्दै आएको छ:

Hezbollah (लेबनान)

Houthis (यमन)

Hamas (प्यालेस्टाइन)

अमेरिकाले यी समूहलाई “आतंकवादी” मान्दै आएको छ, जसले द्वन्द्वलाई अझ जटिल बनाएको छ।

३. इजरायलको सुरक्षा

इरानले Israel लाई मान्यता नदिने र उसको विरोध गर्ने नीति अपनाएको छ।इजरायल अमेरिकाको प्रमुख रणनीतिक साझेदार भएकाले यो विषय द्वन्द्वको केन्द्रमा रहन्छ।

पछिल्लो तनाव: युद्धको किनारमा

हालका वर्षहरूमा द्वन्द्व झन् खतरनाक दिशातर्फ गएको देखिन्छ।

२०२०: Qasem Soleimani को अमेरिकी ड्रोन हमलामा हत्या

२०२३–२४: Gaza War को क्रममा सिरिया, इराक र लाल सागर क्षेत्रमा आक्रमण–जवाफी आक्रमण

यी घटनाले “छद्म युद्ध” लाई वास्तविक युद्धमा रूपान्तरण हुने जोखिम बढाएको छ।

 निष्कर्ष: शक्ति, विचारधारा र वर्चस्वको लडाइँ

अमेरिका–इरान द्वन्द्व केवल भू-राजनीतिक विवाद मात्र होइन। यो विचारधारा, शक्ति सन्तुलन र क्षेत्रीय प्रभुत्व को संघर्ष हो।

अमेरिका: मध्यपूर्वमा प्रभाव कायम राख्न र इजरायलको सुरक्षा सुनिश्चित गर्न चाहन्छ

इरान: क्षेत्रबाट अमेरिकी प्रभाव हटाएर आफूलाई क्षेत्रीय शक्तिका रूपमा स्थापित गर्न खोज्छ

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