Attacks on US Tech Data Centres in the Middle East Raise Concerns Over Digital Infrastructure Security

मध्यपूर्वमा अमेरिकी टेक डेटा सेन्टरमाथि आक्रमणको दाबी, डिजिटल पूर्वाधारको सुरक्षामाथि प्रश्न नेपाली

मध्य पूर्व में अमेरिकी टेक डेटा सेंटरों पर हमलों से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ीं। हिंदी

मध्यपूर्वमा अमेरिकी टेक डेटा सेन्टरमाथि आक्रमणको दाबी, डिजिटल पूर्वाधारको सुरक्षामाथि प्रश्न 中文

Attacks on US Tech Data Centres in the Middle East Raise Concerns Over Digital Infrastructure Security

 Rising tensions between Iran and the alliance of United States and Israel have reportedly brought major American technology companies’ data centres in the Middle East into the spotlight as potential targets.

According to international reports, commercial cloud data centres located in United Arab Emirates and Bahrain were hit by drone and missile attacks, raising serious questions about the security of the region’s digital infrastructure.

 

Media reports say that at around 4:30am on 1 March, an Iranian “Shahed-136” drone struck a data centre operated by Amazon Web Services (AWS) in the UAE. The strike reportedly triggered a major fire and caused a power outage, disrupting several digital services.

 

Shortly afterwards, another AWS data facility was also targeted, while a separate Amazon-related facility in Bahrain was reportedly damaged by a drone explosion.

 

Disruption to digital services

 

The attacks are said to have disrupted several digital platforms across the UAE and Bahrain. Services including the ride-hailing and delivery app Careem, payment service providers, and major financial institutions were reportedly affected.

 

Among them, online services of Abu Dhabi Commercial Bank and Emirates NBD experienced temporary disruptions, according to reports.

 

Amazon has reportedly advised customers to ensure data safety and move servers to alternative regions where possible.

 

Iran’s claims

Iranian state-linked media and sources associated with the Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) have claimed that the targeted facilities were supporting “enemy military and intelligence activities”.

 

Reports say Iran has accused Western technology companies of providing technological support to the Israeli military, particularly through cloud infrastructure linked to the “Project Nimbus” programme.

 

Iranian military authorities have also reportedly warned civilians to stay at least one kilometre away from banks and financial centres linked to US or Israeli economic interests.

 

More companies on potential target list

 

Regional media reports indicate that Iran has also listed several major technology companies as possible future targets, including Google, Microsoft, Palantir Technologies, IBM, Nvidia and Oracle Corporation.

Impact on AI ambitions in the Gulf

The United Arab Emirates has been investing billions of dollars to develop artificial intelligence as a key pillar of its future economy.

In Abu Dhabi, a massive artificial intelligence data centre project known as “Stargate UAE” is under development through a partnership between OpenAI and Oracle Corporation. However, the recent attacks have raised new concerns about the security of such large-scale technology projects.

 

A new target in modern warfare

Security analysts say the incidents highlight how digital infrastructure is increasingly becoming a strategic target in modern conflicts.

Data centres play a critical role in global cloud services, financial systems, and government digital operations. Experts warn that attacks on such infrastructure could cause widespread economic and technological disruption.

 

The developments have also sparked broader debate over the future of American technology investments and digital infrastructure security across the Middle East.

इरान र संयुक्त राज्य अमेरिका–इजरायल बीच बढ्दै गएको क्षेत्रीय तनावबीच मध्यपूर्वमा रहेका अमेरिकी प्रविधि कम्पनीका डेटा सेन्टरहरू आक्रमणको निशानामा परेको दाबी गरिएको छ।

 

रिपोर्टहरूका अनुसार United Arab Emirates र Bahrain मा रहेका व्यावसायिक क्लाउड डेटा सेन्टरहरूमा ड्रोन र मिसाइल आक्रमण भएको बताइएको छ, जसले क्षेत्रीय डिजिटल पूर्वाधारको सुरक्षामाथि गम्भीर प्रश्न उठाएको छ।

 

अन्तर्राष्ट्रिय सञ्चारमाध्यमका अनुसार १ मार्च बिहान करिब ४:३० बजे इरानी ‘शाहेद–१३६’ ड्रोनले यूएईमा रहेको Amazon Web Services (AWS) को डेटा सेन्टरलाई निशाना बनाएको थियो। उक्त आक्रमणपछि त्यहाँ ठूलो आगलागी भएको र विद्युत् आपूर्ति अवरुद्ध हुँदा सेवा प्रभावित भएको बताइएको छ।

 

त्यसको केही समयपछि अमेजनकै अर्को डेटा सेन्टरमा पनि प्रहार भएको र बहराइनमा रहेको कम्पनीको सुविधा केन्द्रमा ड्रोन विस्फोटका कारण क्षति पुगेको रिपोर्टहरूमा उल्लेख गरिएको छ।

 

डिजिटल सेवामा व्यापक असर

 

आक्रमणपछि यूएई र बहराइनमा विभिन्न डिजिटल सेवाहरूमा अवरोध आएको जनाइएको छ। ट्याक्सी तथा डेलिभरी सेवा एप Careem, भुक्तानी सेवा प्रदायक कम्पनीहरू र वित्तीय संस्थाहरू प्रभावित भएका थिए।

 

त्यसमध्ये Abu Dhabi Commercial Bank र Emirates NBD जस्ता प्रमुख बैंकहरूको केही डिजिटल सेवा अस्थायी रूपमा अवरुद्ध भएको रिपोर्टहरूमा उल्लेख गरिएको छ।

 

अमेजनले आफ्ना ग्राहकहरूलाई डेटा सुरक्षित राख्न वैकल्पिक क्षेत्रका सर्भर प्रयोग गर्न सुझाव दिएको बताइएको छ।

 

इरानको दाबी

 

इरानी राज्यनियन्त्रित सञ्चारमाध्यम र Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) सँग सम्बन्धित स्रोतहरूले ती डेटा सेन्टरहरूले “शत्रुका सैन्य र गुप्तचर गतिविधि”लाई सहयोग गरेको आरोप लगाएका छन्।

 

रिपोर्टअनुसार इरानले अमेरिकी र पश्चिमी प्रविधि कम्पनीहरूलाई इजरायली सेनालाई प्रविधि उपलब्ध गराएको आरोप लगाएको छ, विशेष गरी क्लाउड कम्प्युटिङ परियोजना “प्रोजेक्ट निम्बस” सँग सम्बन्धित सहयोगका कारण।

 

यसैबीच इरानी सैन्य कमाण्डले अमेरिकी वा इजरायली आर्थिक हितसँग जोडिएका बैंक तथा आर्थिक केन्द्रहरूबाट सर्वसाधारणलाई कम्तीमा एक किलोमिटर टाढा रहन चेतावनी दिएको बताइएको छ।

 

थप कम्पनीहरू पनि सम्भावित निशानामा

 

क्षेत्रीय मिडिया रिपोर्टहरूका अनुसार इरानले Google, Microsoft, Palantir Technologies, IBM, Nvidia र Oracle Corporation जस्ता ठूला प्रविधि कम्पनीहरूलाई पनि भविष्यका सम्भावित निशानामा राखेको जनाएको छ।

 

एआई लगानीमा सम्भावित प्रभाव

 

United Arab Emirates ले आर्टिफिसियल इन्टेलिजेन्सलाई भविष्यको प्रमुख आर्थिक क्षेत्रका रूपमा विकास गर्ने लक्ष्य राख्दै अर्बौँ डलर लगानी गरिरहेको छ।

 

आबुधाबीमा निर्माणाधीन विश्वकै ठूलो एआई डेटा सेन्टर “स्टारगेट यूएई” परियोजनामा OpenAI र Oracle Corporation को साझेदारी रहेको बताइएको छ। तर पछिल्ला आक्रमणहरूले यस्ता परियोजनाको सुरक्षामाथि नयाँ चिन्ता पैदा गरेको विश्लेषकहरूले बताएका छन्।

 

आधुनिक युद्धमा नयाँ लक्ष्य

 

सुरक्षा विश्लेषकहरूका अनुसार यी घटनाहरूले आधुनिक युद्धमा डिजिटल पूर्वाधार पनि महत्वपूर्ण रणनीतिक लक्ष्य बन्न थालेको संकेत गर्छ।

 

डेटा सेन्टरहरू विश्वव्यापी क्लाउड सेवा, वित्तीय प्रणाली र सरकारी डिजिटल सेवाका लागि अत्यन्त महत्वपूर्ण हुने भएकाले यस्ता संरचनामाथि हुने आक्रमणले ठूलो आर्थिक र प्राविधिक असर पार्न सक्ने विज्ञहरू बताउँछन्।

 

यसले मध्यपूर्वमा अमेरिकी प्रविधि कम्पनीहरूको लगानी र डिजिटल पूर्वाधारको सुरक्षाबारे नयाँ बहस सुरु गराएको छ।

 ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका तथा इज़राइल के गठबंधन के बीच बढ़ते तनाव ने कथित तौर पर मध्य पूर्व में प्रमुख अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के डेटा केंद्रों को संभावित लक्ष्यों के रूप में सुर्खियों में ला दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में स्थित वाणिज्यिक क्लाउड डेटा केंद्रों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबर है, जिससे क्षेत्र के डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के बारे में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

 

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि 1 मार्च को सुबह लगभग 4:30 बजे, एक ईरानी "शहेद-136" ड्रोन ने यूएई में अमेज़न वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) द्वारा संचालित एक डेटा केंद्र पर हमला किया। इस हमले से कथित तौर पर एक बड़ी आग लग गई और बिजली गुल हो गई, जिससे कई डिजिटल सेवाएं बाधित हुईं।

 

इसके तुरंत बाद, एक और एडब्ल्यूएस डेटा सुविधा को भी निशाना बनाया गया, जबकि बहरीन में अमेज़न से संबंधित एक अलग सुविधा को कथित तौर पर एक ड्रोन विस्फोट से नुकसान पहुंचा।

 

डिजिटल सेवाओं में व्यवधान

 

इन हमलों से यूएई और बहरीन में कई डिजिटल प्लेटफॉर्म बाधित हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, राइड-हेलिंग और डिलीवरी ऐप करीम, भुगतान सेवा प्रदाता और प्रमुख वित्तीय संस्थान सहित सेवाएं प्रभावित हुईं।

 

रिपोर्टों के अनुसार, अबू धाबी कमर्शियल बैंक और एमिरेट्स एनबीडी की ऑनलाइन सेवाओं में अस्थायी व्यवधान अनुभव किया गया।

 

अमेज़न ने कथित तौर पर ग्राहकों को डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जहां संभव हो, सर्वर को वैकल्पिक क्षेत्रों में ले जाने की सलाह दी है।

 

ईरान के दावे

ईरानी राज्य-संबद्ध मीडिया और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि लक्षित सुविधाएं "शत्रु सैन्य और खुफिया गतिविधियों" का समर्थन कर रही थीं।

 

रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान ने पश्चिमी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर इज़राइली सेना को तकनीकी सहायता प्रदान करने का आरोप लगाया है, विशेष रूप से "प्रोजेक्ट निम्बस" कार्यक्रम से जुड़े क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से।

 

ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कथित तौर पर नागरिकों को अमेरिकी या इजरायली आर्थिक हितों से जुड़े बैंकों और वित्तीय केंद्रों से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी भी दी है।

 

संभावित लक्ष्य सूची में और भी कंपनियां

 

क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईरान ने Google, Microsoft, Palantir Technologies, IBM, Nvidia और Oracle Corporation सहित कई प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को संभावित भविष्य के लक्ष्यों के रूप में भी सूचीबद्ध किया है।

खाड़ी में एआई महत्वाकांक्षाओं पर प्रभाव

संयुक्त अरब अमीरात अपनी भविष्य की अर्थव्यवस्था के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विकसित करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है।

अबू धाबी में, "स्टारगेट यूएई" नामक एक विशाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा केंद्र परियोजना OpenAI और Oracle Corporation के बीच साझेदारी के माध्यम से विकसित की जा रही है। हालांकि, हाल के हमलों ने ऐसी बड़े पैमाने की प्रौद्योगिकी परियोजनाओं की सुरक्षा के बारे में नई चिंताएं बढ़ा दी हैं।

 

आधुनिक युद्ध में एक नया लक्ष्य

सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ये घटनाएं इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि आधुनिक संघर्षों में डिजिटल बुनियादी ढांचा तेजी से एक रणनीतिक लक्ष्य बनता जा रहा है।

डेटा केंद्र वैश्विक क्लाउड सेवाओं, वित्तीय प्रणालियों और सरकारी डिजिटल ऑपरेशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे बुनियादी ढांचे पर हमले व्यापक आर्थिक और तकनीकी व्यवधान पैदा कर सकते हैं।

 

इन घटनाक्रमों ने मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रौद्योगिकी निवेश और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के भविष्य को लेकर व्यापक बहस भी छेड़ दी है।

इरान र संयुक्त राज्य अमेरिका–इजरायल बीच बढ्दै गएको क्षेत्रीय तनावबीच मध्यपूर्वमा रहेका अमेरिकी प्रविधि कम्पनीका डेटा सेन्टरहरू आक्रमणको निशानामा परेको दाबी गरिएको छ।

 

रिपोर्टहरूका अनुसार United Arab Emirates र Bahrain मा रहेका व्यावसायिक क्लाउड डेटा सेन्टरहरूमा ड्रोन र मिसाइल आक्रमण भएको बताइएको छ, जसले क्षेत्रीय डिजिटल पूर्वाधारको सुरक्षामाथि गम्भीर प्रश्न उठाएको छ।

 

अन्तर्राष्ट्रिय सञ्चारमाध्यमका अनुसार १ मार्च बिहान करिब ४:३० बजे इरानी ‘शाहेद–१३६’ ड्रोनले यूएईमा रहेको Amazon Web Services (AWS) को डेटा सेन्टरलाई निशाना बनाएको थियो। उक्त आक्रमणपछि त्यहाँ ठूलो आगलागी भएको र विद्युत् आपूर्ति अवरुद्ध हुँदा सेवा प्रभावित भएको बताइएको छ।

 

त्यसको केही समयपछि अमेजनकै अर्को डेटा सेन्टरमा पनि प्रहार भएको र बहराइनमा रहेको कम्पनीको सुविधा केन्द्रमा ड्रोन विस्फोटका कारण क्षति पुगेको रिपोर्टहरूमा उल्लेख गरिएको छ।

 

डिजिटल सेवामा व्यापक असर

 

आक्रमणपछि यूएई र बहराइनमा विभिन्न डिजिटल सेवाहरूमा अवरोध आएको जनाइएको छ। ट्याक्सी तथा डेलिभरी सेवा एप Careem, भुक्तानी सेवा प्रदायक कम्पनीहरू र वित्तीय संस्थाहरू प्रभावित भएका थिए।

 

त्यसमध्ये Abu Dhabi Commercial Bank र Emirates NBD जस्ता प्रमुख बैंकहरूको केही डिजिटल सेवा अस्थायी रूपमा अवरुद्ध भएको रिपोर्टहरूमा उल्लेख गरिएको छ।

 

अमेजनले आफ्ना ग्राहकहरूलाई डेटा सुरक्षित राख्न वैकल्पिक क्षेत्रका सर्भर प्रयोग गर्न सुझाव दिएको बताइएको छ।

 

इरानको दाबी

 

इरानी राज्यनियन्त्रित सञ्चारमाध्यम र Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) सँग सम्बन्धित स्रोतहरूले ती डेटा सेन्टरहरूले “शत्रुका सैन्य र गुप्तचर गतिविधि”लाई सहयोग गरेको आरोप लगाएका छन्।

 

रिपोर्टअनुसार इरानले अमेरिकी र पश्चिमी प्रविधि कम्पनीहरूलाई इजरायली सेनालाई प्रविधि उपलब्ध गराएको आरोप लगाएको छ, विशेष गरी क्लाउड कम्प्युटिङ परियोजना “प्रोजेक्ट निम्बस” सँग सम्बन्धित सहयोगका कारण।

 

यसैबीच इरानी सैन्य कमाण्डले अमेरिकी वा इजरायली आर्थिक हितसँग जोडिएका बैंक तथा आर्थिक केन्द्रहरूबाट सर्वसाधारणलाई कम्तीमा एक किलोमिटर टाढा रहन चेतावनी दिएको बताइएको छ।

 

थप कम्पनीहरू पनि सम्भावित निशानामा

 

क्षेत्रीय मिडिया रिपोर्टहरूका अनुसार इरानले Google, Microsoft, Palantir Technologies, IBM, Nvidia र Oracle Corporation जस्ता ठूला प्रविधि कम्पनीहरूलाई पनि भविष्यका सम्भावित निशानामा राखेको जनाएको छ।

 

एआई लगानीमा सम्भावित प्रभाव

 

United Arab Emirates ले आर्टिफिसियल इन्टेलिजेन्सलाई भविष्यको प्रमुख आर्थिक क्षेत्रका रूपमा विकास गर्ने लक्ष्य राख्दै अर्बौँ डलर लगानी गरिरहेको छ।

 

आबुधाबीमा निर्माणाधीन विश्वकै ठूलो एआई डेटा सेन्टर “स्टारगेट यूएई” परियोजनामा OpenAI र Oracle Corporation को साझेदारी रहेको बताइएको छ। तर पछिल्ला आक्रमणहरूले यस्ता परियोजनाको सुरक्षामाथि नयाँ चिन्ता पैदा गरेको विश्लेषकहरूले बताएका छन्।

 

आधुनिक युद्धमा नयाँ लक्ष्य

 

सुरक्षा विश्लेषकहरूका अनुसार यी घटनाहरूले आधुनिक युद्धमा डिजिटल पूर्वाधार पनि महत्वपूर्ण रणनीतिक लक्ष्य बन्न थालेको संकेत गर्छ।

 

डेटा सेन्टरहरू विश्वव्यापी क्लाउड सेवा, वित्तीय प्रणाली र सरकारी डिजिटल सेवाका लागि अत्यन्त महत्वपूर्ण हुने भएकाले यस्ता संरचनामाथि हुने आक्रमणले ठूलो आर्थिक र प्राविधिक असर पार्न सक्ने विज्ञहरू बताउँछन्।

 

यसले मध्यपूर्वमा अमेरिकी प्रविधि कम्पनीहरूको लगानी र डिजिटल पूर्वाधारको सुरक्षाबारे नयाँ बहस सुरु गराएको छ।

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